Wednesday - भारत में कृषि क्षेत्र में बैंक
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भारत में कृषि क्षेत्र में बैंक
अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों, जिसमें कृषि एक प्रमुख क्षेत्र है, को उचित ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बैंको का राष्ट्रीयकरण किया गया था। सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए बैंको द्वारा कृषि क्षेत्र को पर्याप्त मात्रा में वित्त की आवश्यकता होती है। सरकार ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे 2004-05 से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष से तीन वर्ष तक कृषि क्षेत्र में ऋण आवंटन को दोगुणा किया जाए। सरकार की विशेष रूचि और 11वीं योजना में कृषि के लिए विशेष बज़ट आवंटन के मद्देनजर किसानों पर निर्भर है कि वे बैंको द्वारा प्रदत्त योजना से किस हद तक लाभ उठाते हैं। कुछ राष्ट्रीय बैंकों से ऋण के प्रस्ताव की सूची निम्न प्रकार से है-
इलाहाबाद बैंक (www.allahabadbank.com)
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किसान शक्ति योजना
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किसान अपनी पसंद के कार्य में ऋण का उपयोग करने को स्वतंत्र
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किसी मार्ज़िन की जरूरत नहीं
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निजी/घरेलू उद्देश्य के लिए 50 प्रतिशत तक के ऋण राशि का उपयोग किया जा सकता है जिसमें साहूकारों के ऋणों की पुनर्अदायगी भी शामिल होगी।
आँध्रा बैंक (www.andhrabank-india.com)
बैंक ऑफ बड़ौदा (www.bankofbaroda.com)
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शुष्क भूमि कृषि के लिए सेकेण्ड हैण्ड ट्रैक्टर्स खरीद योज़ना
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डीलर्स/वितरक/कृषि आगत के व्यापारी/ पशुधन के लिए आवश्यक पूँज़ी
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कृषि औज़ारों को किराये पर लेना
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बागवानी का विकास
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डेयरी का विकास
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डेयरी, सुअर पालन, मुर्गी पालन, रेशमकीट पालन इत्यादि में कार्यरत यूनिटों के लिए कार्यगत पूँज़ी।
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कृषि औज़ारों, साधनों, बैलों की ज़ोड़ी, सिंचाई सुविधाओं के सृज़न हेतु अनुसूचित जाति/जनज़ाति वर्गों को वित्तीय सहायता।
बैंक ऑफ इंडिया (www.bankofindia.com)
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स्टार भूमिहीन किसान कार्ड - साझेदारों, काश्तकारी किसानों के लिए।
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किसान समाधान कार्ड - फसल उत्पादन एवं अन्य संबंधित निवेशों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड
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बैंक ऑफ इंडिया शताब्दी कृषि विकास कार्ड- किसानों के लिए कहीं भी किसी भी समय बैंकिंग के लिए इलेक्ट्रॉनिक कार्ड
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संकर बीज़ उत्पादन, कपास उद्योग, गन्ना उद्योग इत्यादि में ठेका कृषि के लिए अनुदान
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स्व सहायता समूह के लिए विशेष स्कीम और महिलाओं को सशक्त करना
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स्टार स्वरोज़गार प्रशिक्षण संस्थान (एस. एस.पी .एस), किसानों के लिए उद्यमीय प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु नई पहल।
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फसल ऋण- 7 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से 3 लाख रुपये तक।
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सहयोजित सुरक्षा- 50 हज़ार रुपये तक, किसी प्रकार के प्रतिभूति की आवश्यकता नहीं, परन्तु 50 हज़ार से ऊपर के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक के निदेशों का पालन किया जाएगा।
देना बैंक (www.denabank.com) देना बैंक गुज़रात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ एवं दादरा व नगर हवेली एवं केन्द्र शासित प्रदेश में विशेष रूप से सक्रिय
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देना किसान गोल्ड क्रेडिट कार्ड स्कीम
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10 लाख रुपये तक की अधिकतम ऋण सीमा
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बच्चों की शिक्षा को मिलाकर घरेलू व्यय हेतु 10 प्रतिशत का प्रावधान
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9 वर्षों तक दीर्घावधि पुनर्अदायगी अवधि
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कृषि औज़ारों, ट्रैक्टरों, फव्वारा सिंचाई पद्धति, ऑयल इंजन, इलेक्ट्रिक पंप सेट जैसे कृषि उपकरण के लिए निवेश के लिए ऋण की उपलब्धता
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7 प्रतिशत की दर से 3 लाख रुपये तक अल्पावधि फसल ऋण
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15 दिनों के भीतर ऋणों का निपटान
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50 हज़ार रुपये तक कृषि ऋणों के लिए कोई प्रतिभूति नहीं तथा एग्री- क्लीनिक और एग्री बिज़नेस ईकाई की स्थापना हेतु 5 लाख रुपये।
ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (www.obcindia.com)
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ओरिएंटल ग्रीन कार्ड (ओ.जी.सी.) स्कीम
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कृषि ऋण हेतु कम्पोज़िट क्रेडिट स्कीम
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शीत भंडारण/गोदाम की स्थापना
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वित्त पोषण कमीशन एजेन्ट
पंज़ाब नेशनल बैंक (www.pnbindia.com)
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पी.एन.बी. किसान सम्पूर्ण ऋण योज़ना
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पी.एन.बी. किसान इच्छा पूर्ति योजना
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शीत भंडारण प्राप्तियों की गिरवी के बदले आलू/फलों का उत्पादन
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स्व प्रेरित संयुक्त कृषक
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वन नर्सरी का विकास
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बंजरभूमि विकास
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कुकुरमुत्ता, झींगापन एवं कुकुरमुत्ता झींगा उत्पादन
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दुधारू पशुओं की खरीद एवं देखभाल
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डेयरी विकास कार्ड स्कीम
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मछली पालन, सुअर पालन, मधुमक्खी पालन हेतु योज़ना
स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद (www.sbhyd.com)
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फसल ऋण एवं कृषि गोल्ड ऋण
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कृषि उत्पाद का विपणन
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शीत भंडार/निज़ी गोदाम
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लघु सिंचाई एवं कुँआ खुदाई योजना/पुराने कुँओं के विकास की योजना
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भूमि विकास वित्त पोषण
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ट्रैक्टर, पावर टिलर एवं औज़ारों की खरीद
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कृषि भूमि/परती/बंजर भूमि की खरीद
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किसानों के लिए वाहन ऋण
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ड्रिप सिंचाई एवं छिड़काव
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स्व सहायता समूह
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एग्री क्लीनिक एवं कृषि व्यापार केन्द्र
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युवा कृषि प्लस योज़ना
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (www.statebankofindia.com)
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फसल ऋण योज़ना (ए. सी. सी.)
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अपने परिसर में उत्पाद का भंडारण एवं अगले मौसम के लिए ऋणों का नवनीकरण
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किसान क्रेडिट कार्ड योज़ना
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भूमि विकास योजना
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लघु सिंचाई योज़ना
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संयुक्त फसल कटाई मशीन की खरीद
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किसान गोल्ड कार्ड योज़ना
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कृषि प्लस योज़ना - ग्रामीण युवा को ट्रैक्टर को किराए पर दिलाना
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अर्थियाज़ प्लस स्कीम- कमीशन एजेन्टों के लिए
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ब्रॉयलर प्लस योज़ना- ब्रॉयलर कृषि
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अग्रणी बैंक योजना
सिंडीकेट बैंक (www.syndicatebank.com)
विज़या बैंक (www.vijayabank.com)
महत्वपूर्ण बैंक सम्पर्क
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Tuesday - किसान कृषि कार्ड
योजना का नाम : किसान कृषि कार्ड
किसान कृषि कार्ड योजना के अर्न्तगत किसानों को Qसल उत्पादन के लिए खाद, कीटनाशक दवाईयों, बीज एवं अन्य सामग्री के साथ-साथ उपभोक्ता खर्च जैसे कि शिक्षा, चिकित्सा या कोई अन्य आकस्मिक खर्चो की पूर्ति हुतू कार्यशील पूंजी के रूप में ऋण सुविधा उपलव्ध करवाई जाती हैं।
1. पात्रता : शिक्षित एवं अशिक्षित किसान, काश्तकार, पट्टेदार, पैतृक खेती के अधिकारी किसान, मौखिक काश्तकार यदि भूमि स्वामी सहऋणी बने।
जोत भूमि का आकार अधिकतम ऋण सीमा की पात्रता
2.5 एकड भूमि 30,000/- रू0 तक
2.5 एकड से अधिक एवं 6 एकड तक 2 लाख रू0 तक
6 एकड से अधिक 3 लाख रू0 तक।
नोट: ऋण राशि की सीमा का निर्धारण कुल आय का 50 प्रतिशत या कुल खर्च़े, 25 प्रतिशत घरेलू खर्चो हेतू अधिकतम 25000/- रू0 या उपरोक्त दर्शाई हुई राशि ¼जो इनमें से कम हो½पर किया जाएगा।
जिन किसानों को यह कार्ड जारी किया जाता हैं वे किसान अपनी आवश्यकतानुसार बैंक से पैसे निकलवा सकते हैं। शिक्षित किसान कार्ड जारी करने वाली शाखा के अतिरिक्त उस बैंक की जिले मे स्थित अन्य शाखाओं से भी पैसा निकलवा सकते हैं। अशिक्षित किसान कार्ड जारी करने का शाखा से ही लेनदेन कर सकते हैं।
समय- समय पर बैंक निर्देशानुसार ब्याज- दर लागू होगी। वर्तमान में ब्याज-दर 11.50 प्रतिशत¼वार्षिक/ साधारण½ हैं।
सम्बन्धित बैंक अपने प्रधान कार्यालय के निर्देशानुसार सेवा प्रभार होगा।
कार्ड जारी करने वाली शाखा द्वारा पैसा देने पर कोई कमीशन नही ली जाएगी लेकिन कार्ड जारी करने वाली शाखा के अतिरिक्त जिले की उसी बैंक की दूसरी शाखा से पैसा लेने पर शाखा द्वारा 2 प्रतिशत कमीशन ली जाएगी।
2 लाख रू0 की ऋण सीमा तक शून्य मार्जिन
2 लाख रू0 से Åपर एवं 4 लाख तक 10 प्रतिशत
4 लाख रू0 से Åपर 15 प्रतिशत
70 साल की उम्र वाले कार्ड धारकों के लिए तथा बैक द्वारा जिनका नाम घोषित किया जाएगा 50,000/- रू0 का दुर्घटना बीमा भी उपलब्ध होगा जिसके लिए बीमा कम्पनी को प्रीमियम 15/-रू0 प्रति कार्ड देना होगा जिसमें से 10/- रू0 प्रति कार्ड बैंक देगा एवं 5/- रू0 प्रति कार्ड ऋणी को देना होगा।
किसान कार्ड 3 साल के लिए जारी किया जाता हैं, जिसका प्रति वर्ष नवीकरण किया जाता हैं।
¼क½ 25,000/- रू0 तक के कृषि कार्ड के लिए
बैंक Qसल/ चल सम्पति का दृष्टि बंधन करेगा।
¼ख½ 25,000/- रू0 से अधिक के कृषि कार्ड के लिए
1½ बैंक Qसल/ चल सम्पति का दृष्टि बंधन करेगा।
2½ बैंक ऋण का 150 प्रतिशत मूल्य की भूमि बंधक विलेख/ मोरगेज
¼छोटे एवं सीमांत किसानों के जलये प्रतिभूति बैंकऋण का 100 प्रतिशत है।½ अथवा
सावधि जमा/ jk"Vªh; बचत पत्र/ किसान विकास पत्र इत्यादि का ग्रहणाधिकार
2. किसी प्रकार के बिल की आवश्यकता नहीं।
3. शिक्षित किसान कार्ड जारी कर्ता बैंक की किसी भी शाखा से भुगतान ले सकते हैं।
4. ऋण लेने के लिए हर Qसल पर नए दस्तावेज भरने की जरूरत नही हैं।
5. अशिक्षित किसान को भी कृषि कार्ड जारी किया जाता हें। परन्तु लेन देन सुविधा केवल जारीकर्ता शाखा से ही उपलब्ध
6. किसान कार्ड धारक का रू0 50,000/- तक दुर्घटना बीमा।
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Monday - खेती के लिए कर्ज या कर्ज की खेती?
भारत में ट्रैक्टर का कारोबार। ट्रैक्टर के कारोबार से जिस कदर काली कमाई होती है वो हैरान कर देती है। भारत में ट्रैक्टर बनाने वाली 14 कंपनियां हैं। इनमें देसी के साथ विदेशी भी शामिल हैं। देश में जो सबसे कम दाम का ट्रैक्टर मिलता है वो देसी तकनीक से बना बेहद छोटी श्रेणी का ट्रैक्टर “अंगद” है। इसकी कीमत एक लाख रुपये के करीब है। मगर इसकी बिक्री बेहद कम होती है। ऐसा इसलिए कि ये ट्रैक्टर यहां के आम किसानों की जरूरत के हिसाब से बेहद छोटा है। ये चर्चा पहले ही की जा चुकी है कि किसानों के लिए सबसे मुफीद ट्रैक्टर 35-40 हॉर्स पॉवर की श्रेणी के होते हैं। बाजार में इनकी कीमत इस आधार पर तय होती है कि आप नकद खरीदेंगे या फिर कर्ज लेकर। नकद और कर्ज की खरीद में 70 हजार से लेकर एक लाख रुपये का अंतर होता है। यानी अगर आप 35-40 हॉर्स पॉवर का ट्रैक्टर नकद खरीदेंगे तो उसकी कीमत तीन से सवा तीन लाख रुपये होगी। लेकिन कर्ज लेकर खरीदने पर आपको चार से सवा चार लाख रुपये चुकाने होंगे। दाम में यह फर्क क्यों? इस फर्क से ट्रैक्टर की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं आता है। उसकी यह कीमत कर्ज की कीमत के तौर पर वसूली जाती है, गुणवत्ता में बढ़ोत्तरी के लिए नहीं। यहां आप कहेंगे कि कर्ज की कीमत तो उस पर वसूला जाने वाला ब्याज होता है, फिर यह कौन सी कीमत है? आपको बताएं कि यह कीमत उन लोगों के द्वारा ब्याज के अतिरिक्त वसूली जाती है, जो किसानों को कर्ज देते और दिलवाते हैं। दरअसल कर्ज लेने की शुरुआत ट्रैक्टर कंपनी का दलाल करता है। उसकी बैंकों से सांठगांठ होती है। इस दलाल का काम ट्रैक्टर कंपनी के लिए ग्राहक ढूंढ कर उसके लिए बैंक से कर्ज की व्यवस्था करवाना होता है। यह बेहद जटिल और उल्टी प्रक्रिया है। मसलन अगर आपको कार खरीदनी हो तो सबसे पहले आप कार की कंपनी और उसके मॉडल को चुनते हैं। फिर डीलर के पास जाकर अपनी जमा पूंजी बताते हैं। जो रकम बच जाती है उसके लिए ऐसा बैंक तलाशते हैं जो सबसे कम ब्याज दर पर कर्ज मुहैया कराए। ऐसा अक्सर होता है कि कार कंपनी का डीलर ही अपने किसी विशेष ऑफर के तहत बैंक से आपके लिए न्यूनतम दर पर कर्ज की व्यवस्था करवा दे। पर भारत में ट्रैक्टर की बिक्री ऐसे नहीं होती। इस सौदे में होता यह है कि ट्रैक्टर कंपनी के दलाल किसानों को बताते हैं कि वो किस बैंक से कितने कर्ज की व्यवस्था करवाएगा। ट्रैक्टर कंपनी के दलाल की इलाके के जिस बैंक के अधिकारियों से गहरी सांठगांठ होती है वह उस बैंक से कर्ज की व्यवस्था ज्यादा आसनी से करवा देता है। इस प्रक्रिया में किसानों के पास से चुनने की वह आजादी जाती रहती है जो कार खरीदते समय हम और आप जैसे शहरी ग्राहकों के पास होती है। उसे उसी कंपनी का ट्रैक्टर खरीदना पड़ता है जिस कंपनी का दलाल उसके लिए कर्ज का बंदोबस्त करता है। बात तय हो जाने पर किसान के साथ वह दलाल बैंक पहुंचता है। अधिकारियों और किसान की मुलाकात होती है और मोटे तौर पर किसान को यह बता दिया जाता है चार लाख ट्रैक्टर के साथ आपको तीन और कृषि उपकरण भी लेने होंगे। ऐसा इसलिए कि ट्रैक्टर अपने आप में कोई उत्पादक वाहन नहीं होता। वह किसी अन्य उपकरण के साथ ही उपयोगी होता है जैसे ट्रेलर, कल्टिवेटर, थ्रेसर वगैरह वगैरह। भारत सरकार की यह नीतिगत मान्यता है कि बिना तीन यंत्र के कोई भी किसान ट्रैक्टर से इतनी आमदनी नहीं कर सकता कि कर्ज को ब्याज समेत चुकता कर दे। यहां यह भी याद रखिये कि कर्ज के एवज में ट्रैक्टर व अन्य उपकरण समेत छह से सात एकड़ सिंचाई योग्य जमीन भी गिरवी रख ली जाती है। ऐसी जमीन जिसकी बाजार में कीमत कम से कम 12-15 लाख रुपये होती है। किसानों की बेबसी का अंदाजा इसी से लगाइये कि अगर वो तीन अतिरिक्त उपकरण बाजार से खरीदना चाहे तो उसे ऐसा करने नहीं दिया जाता। दलाल और बैंक अधिकारी ही यह तय करते हैं कि जो उपकरण खरीदे जाने हैं वो कहां से खरीदे जाएंगे और उनकी कीमत क्या होगी। इसकी एक बड़ी वजह है। खुले बाजार में अगर तीनों उपकरण (ट्रेलर-35 हजार, कल्टिवेटर – 10 हजार और थ्रेसर – 35 हजार रुपये) खरीदे जाएं तो उनकी कीमत 80 हजार रुपये के करीब बैठेगी। वहीं बैंक अधिकारियों और दलाल के दबाव में किसान उन उपकरणों के लिए 1 लाख 25 हजार रुपये (ट्रेलर 55 हजार, कल्टिवेटर 15 हजार और थ्रेसर 55 हजार) चुकाता है। इस प्रकार किसान से ट्रैक्टर के लिए 70 हजार ज्यादा (नकद की तुलना में) और तीन उपकरणों के लिए 50 हजार रुपये ज्यादा वसूले जाते हैं। ऐसा नहीं करने पर किसान को कर्ज नहीं मिलता। चूंकि कर्ज मंजूर करना बैंक अधिकारियों का विवेकाधिकार होता है, इसलिए एक सचेत और पढ़ा लिखा किसान भी कुछ नहीं कर सकता। उसे यह भी नहीं बताया जाता है कि कर्ज नहीं देने के क्या कारण हैं। जनता की जमा पूंजी पर ये बैंक अधिकारी ऐसे नागकुंडली मार कर बैठे हैं, जैसे ये उनका खानदानी अर्जित धन हो। इस गोरखधंधे के बाद शुरू होता है काली कमाई का बंटरबांट। ट्रैक्टर कंपनी और उपकरण निर्माता कंपनी की तरफ से कोट की गई रकम का भुगतान बैंक की तरफ से ड्राफ्ट के जरिये कर दिया जाता है। अधिकारी इसका पूरा ख्याल रखते हैं कि कागजी कार्रवाई में कोई चूक नहीं हो जाए। यही वजह है कि ज्यादातर लोगों को कागजात पर नजर डालने के बाद कुछ भी गलत नहीं लगता। लेकिन कागजी काम पुख्ता करने के तुरंत बाद दलाल ट्रैक्टर कंपनी के डीलर से अतिरिक्त 70 हजार रुपये और उपकरण निर्माता कंपनी से अतिरिक्त 50 हजार रुपये नकद वसूल लाता है। यह सब पिछले दरवाजे से होता है। वसूली गई रकम में से बैंक के अधिकारी अपने हिस्से का 30-40 हजार रुपये वसूल लेते हैं। यह न्यूनतम राशि होती है, अधिकांश समय यह राशि इससे ज्यादा ही होती है। बचे हुए पैसे नीचे पटवारी से लेकर ऊपर जमीन के जिलापंजीयक (रजिस्ट्रार) के बीच बंटते हैं। पटवारी बैंक को गिरवी रखी जमीन की उपज का ब्योरा सत्यापित (अटेस्ट) करके देता है और पंजीयक (रजिस्ट्रार) जमीन को गिरवी रखने संबंधित काम निपटाता है। हम सब जानते हैं कि इस देश में जिस तरह भ्रष्टाचार फैला हुआ है उसमें इनमें से किसी से भी मुफ्त में काम करने की उम्मीद बेमानी है। आखिर में पांच से दस हजार रुपये दलाल के हाथ लगते हैं। यह जानिये कि इस देश में सालाना 4 लाख ट्रैक्टरों की बिक्री होती है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर भारत के मैदानी इलाकों का होता है। यही नहीं 90 फीसदी से ज्यादा ट्रैक्टरों की बिक्री बैंकों के कर्ज पर आधारित है। यानी कर्ज लेकर खरीदे गए ट्रैक्टरों की संख्या 3.6 लाख सालाना से ज्यादा होती है। कुछ मामलों को अपवाद मान कर छोड़ भी दें तो भी 3 लाख ट्रैक्टरों की बिक्री के मामले में पैसे की उगाही दलालों के जरिये ही की जाती है। अब आप इसका गणित देखें। कम से कम एक लाख (ऊपर के हिसाब से 1 लाख 20 हजार रुपये दिखाई गई है) की दर से सालाना तीन लाख ट्रैक्टर के लिए वसूली गई अतिरिक्त व बेजा राशि तीन हजार करोड़ रुपये बैठती है। प्रति वर्ष यह राशि चुकाता है यहां का किसान। इसमें शामिल है वह रकम जो 30 हजार रुपये (कम से कम) प्रति ट्रैक्टर की दर से बैंक अधिकारियों की जेब में जाता है। यानी 900 करोड़ रुपया। आपको मालूम हो कि भारत में कार्यरत लगभग 260 बैंकों में से 90 प्रतिशत का सालाना लाभ इस रकम तक नहीं पहुंचता। सरकार कहती है कि वह बैंकों के माध्यम से किसानों को कर्ज उपलब्ध कराने को प्रतिबद्ध है। यानी मरीज को खून की उपलब्धता हमेशा रहेगी। क्या आपको लगता है कि खून के इस कारोबारी बाजार में मरीज के लिए कभी कोई फेस्टिव सीजन आएगा?
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Sunday - "शेतक-याच्या हितासाठी शेतक-याचा आपला e-Choupal"
"शेतक-याच्या हितासाठी शेतक-याचा आपला ई-चौपाल "
आदर्णीय बन्धु, आज आपण विज्ञानच्या युगात वाटचाल करीत आहो.सर्वविभागात आमुलाग्र्ह बद्दल आपणास पाहायला मिळ्ते पण भुसार बाजार पेठेत का नाही? तीच ती जुनी बाजार व्यवस्था आजही तसीच आहे.त्यामुळे पाहीजे तेवढी प्रगती शेतकरी वर्गात पाहावयास मिळत नाही.आजच्या सायन्स युगात दोन दोन दीवस बाजार पेठेत मुक्काम ठोकावा लागतो.दोन दीवास थाबुन पण योग्य भाव मिळत नाही.तर शेतकरी प्रगती केव्हा करतील ? व्यवहार केव्हा करावा !
शेतक-याच्या भरोस्यावर जगणारे गब्बर अडते, व्यापारी ,हमाल शुध्दा आज बजारपेठेत शेतक-याला चागली वागणुक देत नाहीत. अमाप खर्च वजा करुन पण एक ठोक रक्कम देण्यास टाळा टाळ करतात. त्यामुळे शेतक-याचा नियोजीत कार्यक्रमात फ़ार मोठा बद्द्ल होतो.आणि प्रगतीस आळा बसतो.
शेतकरी बन्धु, आज आपण खरच या सर्व समस्यातुन निघणार आहोत. आयटीसी,आयबीडी कम्पणी विज्ञान माहीती "ई-चौपाल ईन्टरनेट "आपल्या समोर प्रगतीचे खुप मोठे जाळे ठेवणार आहेत.हवी तेवठी प्रगती करण्याचा मुभा आपणा समोर आहे.ह्या नन्तर शेतक-याला स्वाभीमाने जगता येईल.शेतक-यामद्ये नवचेतण्य निर्माण होईल.सम्पुर्ण्ता नव-जीवन नवी दीशा देणारी कम्पणी आहे.त्यासोबत नव्या युगाची नवी बाजारपेठ उभी केलेली आहे.सर्व सोई युक्त बाजारपेठ असेल.
भारत देश कुषी प्रधान देश म्हणुन ऒळखला जातो.हे खरच आहे. येथील बळीराजाचे व्यवसाय शेतीच आहे. या शेतीत राब राब राबुन घाम गाळुन तो शेतात पिक घेतो शेतात राबताना अनेक शेतकरी नवनवे प्रयोग करतात या प्रयोगातुन आपला विकास साधतात.वेग वेगळी पिके, पिके घेण्याची पदत,त्याची अन्तरमशागत,त्याना पाणि देण्याची पदत अशा विविध पातळ्यावर अनेक शेतकारी यशयस्वी प्रयोग करीत असतात.हे त्याचे व्ययक्तीक यश असत.या यशाची दखल्ल घेवुन ही माहीती ईतर शेतक-या पर्यत पोहचवीण्यासाठी "ई-चौपाल"च्या पड्द्यावर शेतक-याची ओळख या सदरात पाहावयास मिळेल.
"आयटीसी,आयबीडी चा एकच ध्यास देशाच्या बळीराजाचे सर्वागीन विकास " आज शेतक-याला उत्पादन नव्हे उत्पन्न हवे,हे योग्यही आहे.त्या अनुषगाने आयटीसी,आयबीडी कम्पाणीने शेतक-यासाठी "ई-चौपाल ईन्टरनेट सेवा" अगदी आपल्या गावात मोफ़त दीलेली आहे.यात देश विदेशातील शेतीविषई बेवसाईट पाहावयास मिळतील यामोलाच्या मार्गदर्शनामुळे प्रतेक शेतकरी हा स्वताच्या उत्पन्नात निश्चीतच भर पाडू शकतो.
भारत देश हा शेती प्रधान देश असुन शेती हा भारतीय अर्थ व्यवस्थेचा कणा आहे.भारतीय शेती जुनाट पद्द्तीवर अवलबून असुन त्यामुळे उत्पन्नात खर्च जास्त,उत्पादन कमी आहे.त्यासाठी शेती विकासावर भर देणे गरजेचे आहे.जुन्या पधतीने शेती केली तर उत्पादनात वाढत नाही.हे स्पष्ट झाले आहे.खरा विकास साधायचा असेल तर तन्त्रविद्या नविन साधन सामुग्री याची शेतीला जोड दीली पाहीजे.तरच उत्पादन वाढेल.म्हत्वाचे म्हणजे शेती उत्पनास योग्य बाजार्पेठ मिळाली पाहीजेत.ते आज पर्यन्त तरी नव्हते पण आज आयटीसी ने नव्या जमान्यातील नवी बाजारपेठे "शेतक-यासाठी शेतक-याची आपली बाजारपेठ" चालु झालेली आहे.
उत्पादन हे केवळ उत्पादनासाठी नव्हे तर समाजाची आणि राष्टाची गरज भागविण्यासाठी करता आले पाहीजे शेती व अन्न राष्ठहीताशी निगडीत असुन या सर्व गोष्टी लक्षात घेवून प्रयत्न झाले पाहीजे.तरच शेती उत्पादन वाढेल.
ई-चौपाल म्हणजे शेतक-याचा विकासाचा पाया,योग्य मर्गदर्शना अभावी शेतक-याला नापीकी होतेय पण ह्या नन्तर अशी पाळी कधापी येणारच नाही.आता आपल्या पाठीसी योग्य मर्गदर्शनासाठी "ई-चौपाल"आणि त्याचे सन्चालक तत्पर हजर असेल.
शेतकरी बन्धुनो,आपल्या मनातील सोनेरी पाहाटचे स्वप्न साकार करायचे आहे. "ई-चौपाल"च्या सर्व सुविधा आपल्याला देण्यात येतील.आपण आपली सन्धी जावू देवू नका आपल्या जवळील "ई-चौपाल"केन्द्राला नेहमी भेट देत राहा.
आपला विकास आपल्या हाती.
चौपाल सन्चालक,
खुशाल सिताराम चव्हाण
फुलवाडी चौपाल.
ता.पुसद,जी.यवतमाळ
09764112400
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